ट्रेडिंग क्या है
?
सामान्य तौर पर
ट्रेडिंग का मतलब क्रय
और विक्रय से हैं, जब
हम किसी वस्तु को खरीदते और उसे बेच देते हैं इस प्रक्रिया को ट्रेडिंग कहते हैं. हम अपने
आसपास हम बहुत सी वस्तुयों को देखते हैं जो किसी ना किसी के
द्वारा खरीदी या बेची जाती है,
वे सभी लोग जो इन वस्तुयों के क्रय विक्रय में शामिल होते हैं ट्रेडर
कहलाते हैं और आपके द्वारा की गई क्रिया जिसमें आप शेयर को
खरीदते हैं और बेचते हैं ट्रेडिंग कहलाती है। शेयर
मार्केट में दो तरह से पैसा लगाया जाता है, एक
है निवेश इन्वेस्टमेंट तो दूसरा ट्रेडिंग।
व्यापार का इतिहास
व्यापार
मानव
सभ्यता
या
यु कहे की कृषि क्रांति के समय से ही अस्तित्व में है। भले ही व्यापार का स्वरूप विभिन्न समाजों में भिन्न-भिन्न रहा जैसे सिन्धुघाटी सभ्यता की बात करे या
ऋग्वैदिक काल हो या यु कहे की महाजनपद काल सुरु होने से पहले तक वस्तु विनिमय प्रणाली व्यवस्था
अर्थात
वस्तु के बदले वस्तु का आदान प्रदान होता था
लेकिन वस्तुयों के मूल्य को मापने के लिए किसी बुनियादी मानक की कमी को देखते हुए वस्तु विनिमय प्रणाली को असुविधाजनक पाया गया। इस असुविधा ने पैसे के लिए रास्ता तैयार किया, जिसने एक मानक के रूप में काम किया जिसके विरुद्ध सभी उत्पादों के मूल्यों को मापा जाता है। इस आविष्कार ने आर्थिक और वित्तीय विकास की एक श्रृंखला शुरू की जैसे कि
ऋण
सुविधा
की
शुरूआत, शेयर ट्रेडिंग
वही यूरोप के देशो में संयुक्त स्टॉक कंपनियों के गठन के साथ स्टॉक ट्रेडिंग अस्तित्व में आई और इसने यूरोपीय साम्राज्यवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न यूरोपीय शहरों में अनौपचारिक शेयर बाज़ार तेजी से बढ़ने लगे। सार्वजनिक रूप से अपने शेयरों का व्यापार करने वाली पहली संयुक्त स्टॉक कंपनी डच ईस्ट इंडिया कंपनी थी
भौगोलिक विस्तार के साथ-साथ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में संयुक्त स्टॉक कंपनियों की सफलता के बाद, उन्हें वित्तीय दुनिया का मुख्य आधार बना दिया गया। भारत और एशिया में ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए पहला एक्सचेंज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज था जिसे 1875 में स्थापित किया गया था। जैसे भारत में BSE, NSE दो मुख्य स्टॉक मार्केट है जहा
ट्रेडिंग होती है।
Share
Market में trading को 5 भागों में विभाजित किया गया है।
✤ इंट्रा-डे ट्रेडिंग (
Intraday Trading )
✤स्विंग ट्रेडिंग या शार्ट टर्म ट्रेडिंग
✤ स्कैल्पर ट्रेडिंग (
Scalper Trading)
✤ पोज़िशनल ट्रेडिंग (
Positional Trading )
5.मोमेंटम ट्रेडिंग
Intraday
Trading क्या है?
Intraday
Trading में एक ही दिन में शेयर खरीद कर उसे बेच दिया जाता है
एक दिन
का मतलब सप्ताह के दिन (बाजार की छुट्टियों को छोड़कर) सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक है। दिन के कारोबार के मामले में,
व्यक्ति कुछ मिनटों या घंटों के लिए स्टॉक रखते हैं। ऐसे व्यापार में शामिल एक व्यापारी को दिन के बाजार बंद होने से पहले अपना लेनदेन बंद करना होगा। यह शेयरों के छोटे पैमाने पर उतार-चढ़ाव का लाभ उठाने के लिए लोकप्रिय है दिन के कारोबार के लिए बाजार के मामलों में दक्षता,
बाजार की अस्थिरता की गहन समझ और स्टॉक मूल्यों में उतार-चढ़ाव के बारे में गहरी समझ की आवश्यकता होती है। इसलिए, यह ज्यादातर अनुभवी निवेशकों या व्यापारियों द्वारा किया जाता है।
Swing
Trading क्या है?
Swing
Trading वह trade जो कुछ दिनों के लिए शेयर को खरीदते और बेचते है। मतलब यह कि वह traders जो एक दो हफ़्ते के लिए शेयर को खरीदने के बाद बेच देते हैं। इसमें ट्रेडर को पूरे दिन चार्ट को देखना नहीं पड़ता है। यह उन लोगो ( जॉब,
स्टूडेंट्स आदि) के लिए बेहतर होता है जो ट्रेडिंग में अपना पूरा दिन नहीं दे सकते हैं। व्यापारी तकनीकी रूप से स्टॉक का विश्लेषण करते हैं ताकि उनके निवेश उद्देश्यों के उचित निष्पादन के लिए उनके द्वारा अपनाए जा रहे मूवमेंट पैटर्न का पता लगाया जा सके।
Scalping
Trading (स्कैल्पर ट्रेडिंग ) क्या
है?
Scalping
Trading वह trade जो कुछ सेकंड या मिनट के लिए trade किया जाए। मतलब यह कि वह traders जो केवल कुछ सेकंड या मिनट के लिए शेयर की खरीद और बिक्री करते हैं। आप सभी को जानना ही चाहिए कि scalping trading को सबसे जायदा रिस्की माना
जाता है इसे माइक्रो-ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। स्कैल्पिंग और डे-ट्रेडिंग दोनों इंट्राडे ट्रेडिंग के सबसेट हैं। स्कैल्पिंग में एक ही बाज़ार दिवस में एक दर्जन से लेकर सौ मुनाफ़े तक बार-बार छोटे मुनाफ़े कमाना शामिल है। हालाँकि, प्रत्येक लेनदेन से लाभ नहीं मिलता है,
और कुछ मामलों में व्यापारी का कुल घाटा लाभ से अधिक हो सकता है। इस मामले में,
प्रतिभूतियों की होल्डिंग अवधि,
डे-ट्रेडिंग की तुलना में कम होती है,
यानी व्यक्ति अधिकतम कुछ मिनटों तक स्टॉक रखते हैं। यह सुविधा लेनदेन की आवृत्ति की अनुमति देती है। डे-ट्रेडिंग के समान,
स्केलिंग के लिए बाज़ार अनुभव,
दक्षता,
बाज़ार के उतार-चढ़ाव के बारे में जागरूकता और त्वरित लेनदेन की आवश्यकता होती है।
Positional
Trading क्या है?
Positional
Trading वह ट्रेड जो कुछ महीने के लिए होल्ड किए जाएं। यह मार्केट का long term movement को कैप्चर करने के लिए किया जाता है। ताकि एक अच्छा मुनाफा हो सके। शेयर बाजार की रोजाना के Up-down से इन पर जायदा असर नहीं होता है। यह बाकी सभी trading से कम रिस्की होता है।
Position
Trading को Delivery Trading भी बोलते है,
क्योंकि Position का मतलब अपना
स्थान फिक्स करना जैसे कि Intraday Trading हम एक दिन के लिए Trading कर सकते थे,
ठीक वैसे ही Position Trading में हम अपने Stock को जो हमे Buy या Sell क्या
है उसको हम होल्ड करके रख सकते है,
कुछ टाइम के लिए।
5.मोमेंटम ट्रेडिंग
मोमेंटम ट्रेडिंग के मामले में, एक व्यापारी स्टॉक की गति का फायदा उठाता है, यानी स्टॉक का एक बड़ा मूल्य मूवमेंट, ऊपर या नीचे की ओर। एक व्यापारी उन शेयरों की पहचान करके ऐसी गति का लाभ उठाने की कोशिश करता है जो या तो टूट रहे हैं या टूट जाएंगे। तेजी की स्थिति में, व्यापारी अपने पास मौजूद स्टॉक बेच देता है, जिससे उसे औसत से अधिक रिटर्न मिलता है। वही गिरावट की स्थिति में, कीमत बढ़ने पर व्यापारी बेचने के लिए काफी मात्रा में स्टॉक खरीदता है।
Trading और Investment में क्या अंतर है?
ट्रेडिंग से पैसे कमाने के लिए आपके पास डिमैट अकाउंट और एक ट्रेडिंग अकाउंट होना चाहिए।
✤ Trading में शेयर को short term के लिए खरीदा जाता है। वहीं Investment में शेयर को लंबे समय के लिए खरीद लिया जाता है।
✤ Trading में टेक्निकल एनालिसिस की जानकारी होना जरूरी होता है। वहीं Investment में fundamental analysis की जानकारी प्राप्त होनी चाहिए।
✤ Trading कि अवधि 1 साल तक की होती है। वहीं Investment कि अवधि 1 साल से ज्यादा कि होती है।
✤ Trading करने वाले लोगों को traders कहा जाता है। वहीं निवेश (Investment)
करने वाले लोगों को निवेशक (Invester) कहां जाता है।
✤ Trading short term मुनाफे को कमाने के लिए किया जाता है वहीं निवेश लंबी अवधि के मुनाफे को कमाने के लिए किया जाता है |
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